Jump to content
Mechanical Engineering Community

Automobile technical

Members
  • Content Count

    8
  • Joined

  • Last visited

About Automobile technical

  • Rank
    Member
  1. माप लेने की विधियां ( Measuring Methods )दो प्रकार के हैं प्रत्यक्ष माप द्वारा (By Dircet Measurement इस विधि द्वारा किसी जॉब को मापते समय किसी दूसरे टूल की आवश्यकता न पड़े उन्हें प्रत्यक्ष माप कहते हैं जैसे स्टील रूल माइक्रोमीटर वर्नियर कैलीपर बेवल प्रोट्रेक्टर इत्यादि। अप्रत्यक्ष माप द्वारा ( By Indirect Measurement ) इस विधि द्वारा किसी जॉब को मापते समय दूसरे टूल की आवश्यकता पड़े उन्हें अप्रत्यक्ष माप कहते हैं जैसे इंन साइड कैलीपर या आउटसाइड कैलीपर का प्रयोग करके स्टील रूल या माइक्रोमीटर से माफ की रीडिंग ली जा सकती है। फुट रूल ( Foot Rule ) एक गज लंबाई को तीन भागों में बांटा जाए तो प्रत्येक भाग में एक फुट नाप दिया जाता है। प्रत्येक फुट लंबाई को 12 भागों में बांटा गया है इन 12 भागों में से प्रत्येक को 1 इंच कहते हैं यानी एक फुट में 12 इंच होते हैं। एक भाग को 1/8 तथा चौथे भाग को 1/4 कहते हैं। फुट रूल के द्वारा छोटे से छोटा माप 1/64 ले सकते हैं। फुट रूल के कुछ इंचो को 16 कुछ को 32 तक और कुछ को 64 में बांटा गया है। ताकि कोई छोटे से छोटा नाप को सही लिया जा सके 16 भाग वाली प्रत्येक रेखा 1/16 के बराबर 32 भाग वाली 1/32 तथा 64 भाग वाली 1/64 के बराबर लंबाई मोटाई होती है। फुट रूल के एक साइड पर ब्रिटिश प्रणाली दी होती है। तथा दूसरी तरफ मीट्रिक प्रणाली भी होती है। मीट्रिक प्रणाली आजकल सारे संसार में फैली हुई है। इस सिस्टम में मिली मीटर, सेंटीमीटर, मीटर इत्यादि होते हैं। कुछ फुट रूल पर सिर्फ मिली मीटर तथा सेंटीमीटर दिए होते हैं। फुट रूल कई प्रकार के होते हैं। जैसे 6 लंबा इंजीनियरिंग स्टील फुट रूल 12",36" इंजीनियरिंग फुट रूल फ़ोल्डिंग तथा तीन फुट से अधिक नापने के लिए टेप आते हैं। इंजीनियरिंग काम करने के लिए स्टील टेप के तथा वस्त्र नापने के लिए गज या मीटर , टेलरिंग नाप के लिए कॉटन टेप आते हैं फूट रूल के एक साइड पर इंच तथा सामने की ओर एम.एम और सेंटीमीटर के निशान होते हैं। यह प्राय: स्टैंडर्ड स्टील, एलुमिनियम, ब्रास तथा लकड़ी के बने होते हैं। सावधानियां ( Safety Precaution ) Read more
  2. Cooling System in Car and Engine परिचय ( Introduction ) पावर स्ट्रोक के अंदर बहुत ज्यादा तापमान हो जाता है। तथा तापमान को दूर करने के लिए कोई ना कोई साधन जरूर अपनाना चाहिए। नहीं तो अधिक गर्मी होने से इंजन के पार्ट्स सीज हो जाएंगे अधिक गर्म होने से इंजन ऑयल की फिल्म टूट जाएगी जिससे इंजन के पार्ट सीज हो जाएंगे वाटर कूलिंग सिस्टम यह सिद्ध हो चुका है। कि इंजन के चलने से फ्यूल की 20% गर्मी फायदेमंद होती है। बाकी की गर्मी बाहर निकालनी पड़ती है कूलिंग सिस्टम 28% गर्मी निकालता है। फ्रिक्शन 5% एनर्जी जली हुई गैसों से 5% और बाकी 2% ट्रांसमिशन को चलाने में खर्च होती है। कूलिंग सिस्टम की किस्में ( Types Of Cooling System. ) गर्मी को दूर करने के लिए दो तरह के कूलिंग सिस्टम प्रयोग में लाए। Read More
  3. Flywheel And Crank Case. फ्लाई - व्हील (Flywheel) फ्लाई व्हील प्राय: स्टील कास्टिंग का गोल पहिया होता है जो क्रैंक्षफ्ट की पिछले फ्लेएंज पर नट बोल्ट द्वारा कसा रहता है एक फ्लाई - व्हील क्रैंक शाफ्ट पर बंधा हुआ रहता है। इसके ऊपर एक रिंग गर्म करके फसाया जाता है जिसके ऊपर सेल्फ स्टार्टर का पिनियन आकार इसको घुमाता है जिससे इंजन स्टार्ट हो जाता है। इसके फेस पर क्लच असेंएबली लगी रहती है। फ्लाई - व्हील की कार्यप्रणाली ( Working System Of Flywheel ) मानो एक सिंगल सिलेंडर इंजन में एक पावर-स्ट्रोक और तीन अन्य स्ट्रोक होती है जिनके चार्ज के अंदर खींचा जाता है इसे कंप्रेस किया जाता है और फिर एग्जास्ट रूप में उन्हें बाहर धकेल आ जाता है इन तीनों स्टोर को मे इंजन इंजन की कुछ शक्ति लग जाती है । और वह धीमी गति से चलना पसंद करता है । लेकिन साथ में पावर - स्ट्रोक उसे फिर ताकत देती है कि वह चलता रहे पावर - स्ट्रोक के अंदर दी ताकत से फ्लाई - व्हील के अंदर मोमेंट ऑफ इनरिया पैदा हो जाता है। जो तीन आईडल स्ट्रोक में घुमाए रखता है और धीरे नहीं होने देता हैं। फ्लाई - व्हील के मुख्य कार्य ( Main Function Of Flywheel )Read More
  4. 🔋 Battery. 1. Introduction of Battery - ऑटोमोबाइल कार के इलेक्ट्रिकल सिस्टम में battery का महतवपूर्ण स्थान है। यह कार के इंजन चलाने के लिए सैल्फ - स्टार्टर को बिजली देती है। 2.Working of Battery - Read More
  5. Interoduction( परिचय ) क्लच प्राय: इंजन और गियर बॉक्स के मध्य में फिट किया जाता है जैसे की fig 1. पर दिखया गया है क्लच प्राय: इंजन की ड्राइव गियर बॉक्स से जोडने या तोड़ने का साधन है। इंटरनल कंबस्शन इंजन प्राय : गाड़ी को चलाने के लिए जरूरी तातक पैदा नही कर पाता। इसलिए जरूरी है की इसका संबंद्व Transmistion से तोड़ा जाये और इंजन को पहले बिना लोड के स्पीड पर चलये ताकि वह काफी टॉर्क बना पाये और धिरे -२ उसकी ड्राइव को Transmistion से जोड़े जिसके बिना झटका लगे गाड़ी चले जब हम क्लच को पूरी अंगेज करे तो यह इंजन की सारी ताकत गियरबॉक्स तक पुंचाये और उसके अंदर कोई स्प्लैज नहीं होनी चाहिए। Fig 1. Layout of Power flow in Vehicle. 2. Function Of Clutch ( क्लच के कार्य )Read More
  6. Torque Converter टार्क कनवर्टर ( Torque converter ) टार्क कनवर्टर फ्लयूड फ्लाई व्हील की आकृति जैसा होता है। अंतर केवल यह है कि फ्लयूड फ्लाई व्हील तो सिर्फ एक को बढ़ा भी सकता है Torque को बढ़ाने के लिए इसके अंदर एक घूमने वाला और मेंबर फिट किया रहता है आप सोच रहे होंगे कि यहां तक बढ़ा सकता है तो गाड़ी में गियर बॉक्स लगाने की क्या आवश्यकता है गाड़ी को पहाड़ी पर चलते समय या बहुत तेज भागने के लिए के लिए फंसी हुई गाड़ी को निकालने के लिए या गाड़ी को पीछे करते समय और गाड़ी को न्यूट्रल में रखने के लिए आवश्यक है कि इसमें गियर बॉक्स लगाया जाए ऐसी गाड़ियों में मोटर फिट होता है उनमें एंट्री टाइप गियर बॉक्स किया रहता है Torque converter Torque कन्वर्टर की विशेषता ( Qualities Of Torque Converter ) Read more in every language.
  7. What is Automatic transmission Gear box. How it's working Automatic Transmission system Automatic Transmission System ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन ऑटोमेैटिक ट्रांसमिशन एक प्रकार का मोटर वाहन ट्रांसमिशन है जो अपने आप जैसे ही वाहन चलाता है और गीयर अनुपात को बदलता है तथा ड्राइवर को गीयर बदलने में आजाद रखता है। काफी ऑटोमेैटिक ट्रांसमिशन गीयर रेंज का सेट होता है। पार्किंग पावल ( powl ) प्रेेैशर के साथ जो स्ट्रोक फेस ट्रांसमिशन की आउटपुट (output shaft ) शाफ्ट को लॉक ( lock )करता है वाहन को आगे पीछे तथा रोलिंग करने के लिए रखता है। उसी तरह परंतु बड़ी डिवाइस हैवी वाहन , औद्योगिक वाहन के लिए प्रयोग की जाती है कुछ महीने सिमित स्पीड रेंज के साथ या फिक्स इंजन स्पीड साथ जैसे कुछ और फोर्कलिफ़्ट और लान मुबर केवल विभिन्न प्रकार के गीयर इंजन में पहिए से देने के लिए टार्क कॉन्वेर्स्टर ( Torque Converster ) का प्रयोग किया जाता है। ऑटोमेैटिक के साथ साथ दूसरे प्रकार ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन ( Transmission ) है। जैसे की ( CUT )कांस्टेंटली ट्रांसमिशन (Continuasly Transmission ) और सेमी ऑटोमेैटिक ट्रांसमिशन जो मनुवली ड्राइवर को गियर शिफ्ट करने free रखते हैं। ट्रांसमिशन के प्रयोग से कंप्यूटर से गीयर चेंज कर के उदाहरण के लिए यदि ड्राइवर रेड लाइन इंजन में हो या रेड लाइन की अवस्था में हो स्पष्ट रूप के बावजूद दूसरे ट्रांसमिशन के समान ऑटोमेैटिक ट्रांसमिशन अंदरूनी ऑपरेशन में अर्थपूर्ण ढंग से अलग है और ड्राइवर की फील feel सेंमी ऑटोमेैटिक और CUTS से। पहला ऑटोमेैटिक ट्रांसमिशन सिस्टम 1921से Alfred Horner Munro of Regina. के द्वारा खोजा गया था तथा यह कैनेडियन पेंटर ( CA235757 in 1923 )के अंडर (Under)पैटट किया गया। सिस्टम इंजन के दौरान मुनरो ने अपनी डिवाइस को डिजाइन किया। जो एयर कंप्रेैस करता है हाइड्रोलिक (Fluid) की बजय और इसकी कम पावर की वजह से कमर्शियल एप्लीकेशन (Application) नहीं हो पाया जाता है पहला ऑटोमेैटिक ट्रांसमिशन का हाइड्रोलिक फ्लूइड प्रयोग में 1930 प्रयोग में जर्नल मोटोरन (General Motorn ) द्वारा किया गया और 1940ओल्ड मोबाइल ( Old - Mobile )में परिणित किया गया जैसे की Hydramatic ट्रांसमिशन। मानवीय ट्रांसमिशन के साथ तुलना ( Comparison With Manual Transmission ) Read more
  8. What is Gear Ratio and What is Torque Ratio definition. गीयर रेशों क्या होती है और टार्क रेशो क्या होती है वर्णन कीजिए। गीयर अनुपात ( Gear Ratio ) जब दो गीयर जिनके दाँते बराबर हो एक - दूसरे को चलाये तो एक के चलाने पर दूसरा भी उसी स्पीड में चलेगा जिसमें उसकी गियर रेशो 1 : 1 होगी। अगर एक छोटा गियर जिसके छ: दांते हैं एक बड़े 18 दाँतों वाले के गीयर को चलाता है। अगर छोटा गीयर तीन चक्कर लगाये तो बड़े दाँतों वाले गीयर का एक पूरा चक्कर होगा। इस हालत में गीयर रेशों 18 : 6 या 3 : 1 रहेगी। Read more about torque ratio
×
×
  • Create New...